परिचय एवं यात्रा
राजा राज राजेश्वर सिंह
राजा राज राजेश्वर सिंह, जो झंडी-राज के नाम से जाने जाते हैं, खीरी जनपद के झंडी राज से हैं।
झंडी राज, निघासन, जनपद खीरी

व्यक्तिगत परिचय
राजा राज राजेश्वर सिंह अपने क्षेत्र में झंडी-राज के नाम से जाने जाते हैं। वे खीरी जनपद के निघासन क्षेत्र में स्थित झंडी राज में रहते हैं, जिस स्थान से उनके परिवार का नाम जुड़ा है।
वे अवध के एक ऐसे परिवार से हैं जिसकी सार्वजनिक भूमिका का लंबा इतिहास रहा है। परिवार के मुद्रित परिचय में उनके सार्वजनिक कार्य को पूर्वजों की सेवा-परंपरा के विस्तार के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
शिक्षा और व्यवसाय
उन्होंने बी.आई.टी. रांची से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त की। पढ़ाई के बाद उन्होंने कृषि को अपना मुख्य व्यवसाय बनाया।
शिक्षा के क्षेत्र में भी उन्होंने योगदान दिया है। जनपद के कई विद्यालयों और एक डिग्री कॉलेज की प्रबंध समिति में वे विभिन्न पदों पर रहे हैं।
जनसंपर्क और सामाजिक कार्य
सामाजिक कार्यों के माध्यम से वे क्षेत्र की जनता से सीधे जुड़े रहे हैं और भारतीय जनता पार्टी में सक्रिय हैं।
राजनीतिक यात्रा
राजा राज राजेश्वर सिंह भारतीय जनता पार्टी में सक्रिय हैं। सार्वजनिक जीवन में उनका आना झंडी राज और निघासन क्षेत्र में सामाजिक कार्यों के माध्यम से हुआ, और वे खीरी जनपद के कई विद्यालयों तथा एक डिग्री कॉलेज की प्रबंध समिति में रहे हैं।
राजा राज राजेश्वर सिंह
सार्वजनिक जीवन और भारतीय जनता पार्टी में
दल
भारतीय जनता पार्टी में सक्रिय।
शिक्षा क्षेत्र
जनपद के कई विद्यालयों और एक डिग्री कॉलेज की प्रबंध समितियों में विभिन्न पद।
सामाजिक कार्य
सामाजिक कार्यों के माध्यम से क्षेत्र की जनता से प्रत्यक्ष संपर्क।
उनके पिता
राजा ब्रजराज सिंह
नीचे का विवरण उनके पिता का है, उनका अपना नहीं।
राजा ब्रजराज सिंह दो बार श्रीनगर विधानसभा से विधायक रहे: पहली बार 1974 में जनसंघ से और दूसरी बार 1977 में जनता पार्टी से। जनसंघ और बाद में भाजपा को जनपद में स्थापित करने में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।
1974
श्रीनगर से विधायक
जनसंघ के टिकट पर श्रीनगर विधानसभा से निर्वाचित हुए।
1975
आपातकाल
आपातकाल के विरुद्ध संघर्ष में भाग लिया और जेल गए।
1977
पुनः विधायक
जनता पार्टी के प्रत्याशी के रूप में श्रीनगर सीट से दोबारा चुने गए।
प्रमुख पड़ाव
तिथियाँ केवल वहीं दी गई हैं जहाँ स्रोत सामग्री में दर्ज हैं।
17वीं सदी
पारिवारिक इतिहास
परिवार का खीरी में बसना
अजमेर की ओर से आए चौहान अखैराज सिंह जहाँगीर के समय खीरी में बसते हैं।
1876
पारिवारिक इतिहास
राजा रघुबर सिंह का जन्म
झंडी राज के राजा रघुबर सिंह का जन्म झंडीपुरवा में होता है और उनका पालन-पोषण वहीं होता है।
1925–30
पारिवारिक इतिहास
अन्तर्वेद आश्रम को भूमि
अन्तर्वेद आश्रम को लगभग 2,200 एकड़ भूमि दान की जाती है।
1932
पारिवारिक इतिहास
राजा रघुबर सिंह का निधन
24 अक्टूबर 1932 को राजा रघुबर सिंह का निधन होता है।
1936
पारिवारिक इतिहास
बड़े पुत्र का निधन
राजा रघुबर सिंह के बड़े पुत्र राजकुमार इक़बाल बहादुर सिंह का सत्रह वर्ष की आयु में निधन।
1945
पारिवारिक इतिहास
राजा राज बहादुर सिंह का निधन
जून में राजा राज बहादुर सिंह का निधन; उनकी धर्मपत्नी रियासत का कार्यभार सँभालती हैं।
1974
राजा ब्रजराज सिंह
राजा ब्रजराज सिंह विधायक निर्वाचित
जनसंघ के टिकट पर श्रीनगर विधानसभा से निर्वाचित।
1975
राजा ब्रजराज सिंह
आपातकाल
राजा ब्रजराज सिंह आपातकाल के विरुद्ध संघर्ष में शामिल होते हैं और जेल जाते हैं।
1977
राजा ब्रजराज सिंह
दूसरी बार विधायक
इस बार जनता पार्टी के टिकट पर श्रीनगर से पुनः निर्वाचित।
1989
राजा ब्रजराज सिंह
बिलराया चीनी मिल
खेतों में गन्ना खड़ा होने पर मिल बंद हो जाती है; वे मामला लखनऊ में गन्ना आयुक्त से दिल्ली में शुगर फ़ेडरेशन तक ले जाते हैं। लगभग तेरह दिन बाद मिल दोबारा चल पड़ती है।
2000
पारिवारिक इतिहास
झंडी पार्क में प्रतिमा
24 अक्टूबर को लखनऊ नगर निगम झंडी पार्क में राजा रघुबर सिंह की प्रतिमा स्थापित करता है।
