राजा रघुबर सिंह का जन्म 1876 में हुआ। उनका पालन-पोषण झंडीपुरवा में राजपूती परंपरा के अनुसार हुआ। घर पर उन्होंने फ़ारसी और संस्कृत सीखी और बाद में अंग्रेज़ी पढ़ने के लिए उन्हें लखीमपुर के सरकारी हाई स्कूल भेजा गया।
पारिवारिक ज़िम्मेदारियों ने जल्द ही उन्हें पढ़ाई से हटाकर संपत्ति के मुक़दमे की ओर मोड़ दिया। मल्लानपुर के राजा देवी बख़्श सिंह की पत्नी रानी पार्वती कुँवर ने अपने पिता राज मिलाप सिंह की उत्तराधिकारी होने का दावा करते हुए पूरी रियासत के विरुद्ध दीवानी वाद दायर किया था। मामला प्रिवी काउंसिल की न्यायिक समिति तक पहुँचा और अंततः उनके पक्ष में तय हुआ।
तत्कालीन सरकार ने उन्हें ऑनरेरी मजिस्ट्रेट के अधिकार दिए, ‘राज’ की उपाधि को मान्यता दी और परिवार के प्रतिनिधि के रूप में दरबार में स्थान दिया। तनिरा के कछवाहा सरदारों और शिमला की पहाड़ियों के केओंथल परिवार समेत कई राजपूत घरानों से उनके वैवाहिक और पारिवारिक संबंध थे।